हमारा देश आज बदलाव के मोड़ पर खड़ा है. चुनाव लगभग हो चुके हैं और हम सब अपनी आने वाली सरकार से उम्मीदें लगाए बैठे हैं. लेकिन जिस बदलाव की हमें उम्मीद है क्या वो हमारी नयी सरकार ला पाएगी. हम दरअसल हर 5 साल के लिए अपनी सरकार चुनते हैं और पूरी तरह यह उम्मीद कर लेते हैं कि अब देश तरक्की करेगा. यह सोच कर हम बैठ जाते हैं की अब कोई और हमारी समस्याओं का हल करेगा. ऐसे सिर्फ वोटिंग बूथ पर पहुँच कर वोट डाल देने से ही काम ख़त्म नहीं हो जाता, यह तो सिर्फ एक शुरुआत है. हमें ही निरंतर एक विकसित देश का सपना बुनना है और सरकार की मदद से इसे पूरा करना है.
अगर हम पीछे मुड़कर देखें तो हमारी आज़ादी भी तो हमारी ही कोशिशों का नतीजा है. इतिहास गवाह है ऐसी कईं क्रांतियों का, जहां कुछ लोगों ने मिलकर एक बड़े बदलाव को अंजाम दिया, ऐसा बदलाव जिसने पूरे देश की सोच को ही बदल कर रख दिया और एक नया इतिहास रच दिया. हमें एक बात को स्पष्ट रूप से समझना होगा कि आज अगर हम अपने आस पास कुछ अच्छा बदलाव लाना चाहते हैं तो हमें खुद से ही शुरुआत करनी होगी. किसी दूसरे से उम्मीद करना गलत होगा. आज अगर हम अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए खुद से शुरुआत करेंगे तो हम दूसरों के लिए एक मिसाल कायम करेंगे, जिससे पूरा देश जिम्मेदारी लेने की एहमियत और ताकत को समझेगा और फिर बनेगा न्यू इंडिया.
आज हमारा देश बहुत कमजोर है, बड़ी बड़ी समस्याओं से घिरा है जैसे अशिक्षित गरीब बच्चे, गन्दगी, भ्रष्ट अधिकारी, महिलाओं के साथ होता गलत व्यहवार. अगर हम अपने आस पास महसूस करें, तो यह समस्याएं हमें हर दिन अपने आस पास दिखती हैं, बस हम इन्हें नजरअंदाज कर अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं अपने में ही खो जाते हैं. अमें जरूरत है इस खुदगर्जी से बाहर निकलने की. हम सब के छोटे छोटे क़दमों से, छोटे छोटे बदलावों से ही एक बड़ा बदलाव आएगा.
